ये डिलीवरी बॉय कैंसिल किया गया ऑर्डर बच्चोें में बांट देता है और उन्हें मुफ्त में पढ़ाता भी है...!

चार वर्ष पहले, मैं कोलकाता में दमदम कैंटोनमेंट के पास सड़क से गुज़र रहा था। तभी एक छोटा लड़का मेरे पास दौड़ता हुआ आया और मेरे पैरों पर गिर कर रोने लगा। वो मुझसे गिड़गिड़ कर भीख मांग रहा था। मुझे लगा इसे नशे की लत है और ये मुझसे पैसा लेकर नशे की दवाईयों के ऊपर ख़र्च करेगा। मैंने उसे दूर हटाने की प्रयास की किन्तु वो ज़िद करने लगा। मैंने उसे थप्पड़ जड़ दिया और वो रोने लगा। यहां से मेरी कहानी शुरू हुई।

कोलकाता के बाक़ी लोगों के लिए Pathikrit Zomato का डिलीवरी बॉय है किन्तु दमदम कौंटोनमेंट के कुछ बच्चों के लिए वो उनका बड़ा भाई है, जिसके ऊपर सब भरोसा करते हैं।

चार वर्ष पहले Pathikrit ने जब उस बच्चे को रुलाया था, तो बाद में वो उसने उसे चुप करा कर बात भी की थी। उसे पता चला कि उस बच्चे को नशे की लत नहीं है। उसकी मां उससे ज़बरदस्ती भीख मंगवाती है। यदि वो ख़ाली हाथ घर जाता है। तो उसकी मां उसे मार देती है। कुछ दिनों बाद जब उस बच्चे को डेंगु हुआ और अस्पताल ने उसकी मां से उसके पिता का नाम पूछा, तो उसे बच्चे के पिता का नाम याद नहीं था। उस इलाके में वो अकेला नहीं था जिसके पिता का कुछ पता नहीं था।

Pathikrit को पता चला कि कई बच्चे रेलवे स्टेशन के पास ऐसे भी हैं, जिन्होंने कभी स्कूल की दहलीज़ को नहीं लांघा। कुछ अनाथ हैं, कुछ को नशे की लत है और सब ग़रीब हैं।

Pathikrit ने उन बच्चों के लिए कुछ करने की ठानी। इसकी शुरुआत इवनिंग स्कूल से हुई। पहले 17 बच्चे जुड़े, प्लेटफ़ॉर्म संख्या 3 पर बैठ कर उससे पढ़ते थे। आज बच्चों की संख्या 27 हो गई है और उनमें से कुछ सरकारी स्कूल भी जाने लगे हैं।

Pathikrit ने उनके पढ़ने की व्यवस्था की, बल्की उन बच्चों के लिए छोटे-छोटे स्टॉल भी लगवा दिए, जिसे चला कर वो अपना पेट पाल सकें। जूस, पानी आदि बेच कर कठिन शारीरिक परिश्रम से बच गए और उन्हें स्कूल जाने की उर्जा मिल गई।

शिक्षा को वृहत स्तर पर ऐसे बच्चों तक पहुंचाने के लिेए Pathikrit ने राज्य के पिछड़े इलाकों में जा-जा कर बच्चों की सहायता की। स्कूल में उनका नामांकन कराया, उनके बीच किताबें बांटी, उन्हें दवाईयां मुहैया कराई।

Pathikrit पहले कोलकाता नगर निगम के लिए काम करता था। बच्चों को और अधिक समय देने के लिए उसने नगर निगम की नौकरी छोड़ दी, हालांकि घर भी चलाना था इसलिए पिछले साल जुलाई में उसने Zomato में डिलीवरी बॉय के तौर पर काम करना शुरू कर दिया।

इस नौकरी में Pathikrit की जान पहचान एक रेस्टोरेंट के मालिक से हुई। वो अपनी पहचान गुप्त रख कर बच्चों की सहायता करने लगे, जो भी ऑर्डर कैंसिल होता, उसे वो बच्चों के लिए भेज देते थे। बच्चों में उनकी पहचान 'रोल काकु' के रूप में बन गई।

आपको बता दें कि Zomato ने हाल ही में Feeding India नाम की एक NGO के साथ पार्टनरशिप की है। इसके तहत जो भी ऑर्डर कैंसिल हो जाता और खाना तैयार हो चुका होता है, तो डिलीवरी बॉय को ये दिशा-निर्देश दिया गया है कि वो खाना किसी नज़दीकी शेलटर होम में पहुंचा दिया जाए।