नौ महीने के बाद जब डिलीवरी का वक़्त आया, ऑपरेशन के बाद बच्चा न हो कर पैदा हुआ यह चीज, नजारा देख सब है दंग...!

थाना हुजूरपुर क्षेत्र के गोड़हिया गांव ननके चौहान की पत्नी गीता ने प्राथमिक सेहत केंद्र खुटेहना पर एक प्लास्टिक बेबी को जन्म दिया है। प्रसव के बाद नवजात प्लास्टिक बेबी की स्थिति देखकर डॉक्टर भी परेशान हैं।

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प्लास्टिक बेबी के रोने व हाथ-पैर हिलाने पर उसके बदन की स्किन फट रही है। इस पर अस्पताल डॉक्टरों ने जब विशेषज्ञों से जानकारी लिया तो पता चला कि नवजात प्लास्टिक बेबी है। जिसके शरीर की खाल प्लास्टिक की झिल्ली जैसी बहुत नाजुक है।

इस पर आनन-फानन में जच्चा-बच्चा को मेडिकल कॉलेज लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया, किन्तु परिवारीजन लखनऊ जाने के अतिरिक्त घर चले गए। पयागपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एनबी जायसवाल का कहना है कि स्त्री का प्रसव स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर आशीष शुक्ला की देखरेख में काम्यबिपूर्वक हुआ है।

डॉक्टरों द्वारा प्लास्टिक बेबी होने की पुष्टि होने के बाद उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज लखनऊ ले जाने की सुझाव दी गई। किन्तु परिवारीजन डॉक्टर की सुझाव को अनदेखा कर जच्चा-बच्चा दोनों को लेकर अपने घर चले गए।
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