30 वर्ष तक फौजी, कारगिल युद्ध भी लड़ा, अब उन्हें कह रहे- तुम इंडियन नहीं हो...!

उपलब्धि- कारगिल युद्ध लड़ा, राष्ट्रपति का मेडल मिला 30 वर्ष तक भारतीय सेना में नौकरी करने वाले इस व्यक्ति को अब ‘विदेशी’ घोषित कर दिया गया है। सेना के बाद वो पुलिस में आ गए थे। फिलहाल असम पुलिस में ही डेप्युटी इंस्पेक्टर की पोस्ट पर तैनात हैं। ने मुहम्मद सना उल्लाह को विदेशी माना।

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इसके बाद मुहम्मद के ही महकमे ने उन्हें पकड़कर एक डिटेंशन सेंटर भेज दिया। गिरफ़्तार करके पुलिस की गाड़ी में बिठाए जाते वक़्त मुहम्मद ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बात कही। कहा- मेरा दिल टूट गया आज। 30 वर्षो तक भारतीय सेना में नौकरी करने और देश की सेवा करने का ये सम्मान मिला है मुझे। मैं भारतीय हूं, पूरे का पूरा भारतीय। मैं ताउम्र हिंदुस्तानी ही रहूंगा।

पुलिस डिपार्टमेंट जानता है, मुहम्मद इंडियन आर्मी में रह चुके हैं


उन्हें सिद्ध करना है कि वो या उनका परिवार 24 मार्च, 1971 के पहले से भारत में रहते आए हैं। पुलिस डिपार्टमेंट जानता है कि मुहम्मद उनके ही विभाग में हैं।पुलिस विभाग का कहना है कि उन्होंने बस कोर्ट के फैसले का पालन किया है। अदालत ने किस आधार पर मुहम्मद को विदेशी माना, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उनका काम है कोर्ट के फैसले की तामील करना, जो उन्होंने किया।

क्या ये निर्णय किसी ग़लतफहमी में आया है?


मुहम्मद सना उल्लाह के वकील अमन वादुद का कहना है कि ये पूरा विषय ग़लतफहमी का है। कोर्ट के आदेश में मुहम्मद को एक मज़दूर बताया गया है, जो कि बिना वैध कागज़ातों के 1971 के बाद भारत आए। जबकि असलियत में मुहम्मद के परिवार के पास 1935 के असम लैंड रेकॉर्ड का दस्तावेज़ है। अमन के अनुसार, वो इस निर्णय को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।

भाजपा का वादा है कि वो अवैध तरीके से भारत में रह रहे सारे घुसपैठियों की पहचान करेगी। इसमें बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए गैर-मुस्लिमों को तो नागरिकता दी जाएगी और मुसलमानों को निकाल बाहर किया जाएगा।

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