उत्तर प्रदेश के इस शहर में आसमान से बरस रही आग, 48 डिग्री के ऊपर पहुंचा पारा...!

प्रयागराज, संगम की रेती पर सूर्य देवता काफी ज्यादा खफा हैं। कुछ माह पहले जहाँ करोड़ो -करोड़ लोग आ रहे थे। अब वहां के ही लोगों के लिए रहना कठिन हो गया है। प्रयाग लगातार पिछले चार दिनों से प्रदेश में अधिकतम गर्मी वाला शहर बना हुआ है।

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गुरुवार ,शुक्रवार की प्रकार शनिवार को भी प्रचंड गर्मी ने 25 वर्ष पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए संगम नगरी में ज्यादातर तापमान 48.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।जो सामान्य से 7 डिग्री ज्यादा है। इसके पहले 30 मई 1994 में अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था।

आसमान से आग बरस रही 

बीते एक सप्ताह से निरंतर प्रयागराज की धरती पर आसमान से आग बरस रही है। यूपी में जहां मथुरा 49 डिग्री के ज्यादातर तापमान दर्ज किया गया, वही सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए तो वही प्रयागराज ने 48.6 डिग्री सेल्सियस गर्मी ने आम जनजीवन को तड़पा दिया।वही तेज़ गर्मी में जितना प्राकृतिक प्रकोप जारी है वही प्रशासनिक जिम्मेदारों की लापरवाही का वर्ष अब हाईकोर्ट पंहुच गया है। शनिवार को सुबह से एक बार फिर चिलचिलाती धूप ने लोगों का जीना दुश्वार किया है। दिन निकलने से ही मौसम में तेज गर्मी का प्रकोप शुरू हो गया। सुबह सात बजे ही 34 डिग्री सेल्सियस का तापमान रिकॉर्ड किया गया। दोपहर 12 बजे 40 डिग्री सेल्सियस पंहुच गया शाम तक और बढ़ने की गुंजाइश बनी हुई है।

सैकड़ों वर्ष पुराने पेड़ काटे 


दरअसल कुंभ के वक़्त इस्तेमाल में अंधाधुंध पेड़ों की कटाई हुई स्वयंसेवी संस्थाओं के तमाम विरोध प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन ने एक नहीं सुनी। विकास और मार्ग के चौड़ीकरण के नाम पर सैकड़ों वर्ष पुराने पेड़ों को काटा गया। शहर में सिविल लाइन चौराहे पर और स्थानों बारह सौ से ज्यादा 100 से 200 वर्ष पुरानी नीम और पाकड़ के पेड़ों को काट दिया गया ।शहर में कंक्रीट की बिल्डिंग के अतिरिक्त सड़कों पर पेड़ नहीं रहे।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुनीत द्विवेदी ने बताया कि प्रयागराज तीन ओर से नदियों से घिरा है नदियों में पानी ना होने से रेत का तापमान काफी तेजी से बढ़ता है। जिसका असर शहर पर दिखाई पड़ रहा है। वही कुंभ के वक़्त मार्ग चौड़ीकरण के लिए हजारों पेड़ काटे गए जिसका दंश अब शहर को झेलना पड़ रहा है।

कुंभ में हुए थे बड़े दावें 

वही कुंभ के समय दिए गये सरकारी आंकड़ों को देखे तो कुंभ से पहले सड़कों के चौड़ीकरण के वक़्त अलग-अलग सरकारी एजेंसियों ने शहर में 25 हजार से अधिक पेड़ लगाएं है।कुंभ के वक़्त अधिकारियों द्वारा यह बताया गया था कि पेड़ों की नियमित देखभाल होगी। किन्तु आलम ये है की शहर के कुछ महत्वपूर्ण मार्गों के किनारे पेड़ दिख रहे हैं और पेड़ों की सिंचाई हो रही है।शहर के बाकी भागो में पेड़ों का कोई पता नहीं है।तमाम पौधे और पेड़ सूख चुके हैं। बक्शी बांध पर कुंभ के से पहले करीब 200 से ज्यादा पौधे सूखे हुए थे। दशा सुमेर घाट और अन्य मार्गों पर लगे पेड़ नहीं बचे हैं शहर में बालसन चौराहे के संगम जाने वाली मार्ग सिविल लाइंस के हॉट स्टेप से सिविल लाइन चौराहे पर जाने वाले मार्ग पर लगे सभी करीब सूखे है।

पर्यावरण का संतुलन बिगड़ा 


प्रोफेसर मौषम वैज्ञानिक एलएस ओझा का कहना है कि हरे पेड़ों के काटे जाने से प्रयागराज के पर्यावरण का संतुलन बुरी तरीके से बिगड़ गया है। सड़कें चौड़ी करने के पीछे जो पेड़ों की कटाई हुई है उसका खामियाजा अब यहाँ के रहने वालों को भुगतना पड़ेगा। सरकारी दावा था कि जितने पेड़ काट रहे उसका 10 गुना लगवाया जाएगा। किन्तु शहर का पर्यावरण पूरी तरीके से ध्वस्त हो चुका है। शहर में तेजी से पौधरोपण की जरूरत है। सड़कों के किनारे छोटे -छोटे तालाब भी बनने चाहिए पेड़ों के कटने से तापमान और अधिक बढ़ने की संभावना है।

क्या कहते है सरकारी आंकड़े 

हाईकोर्ट की एक याचिका में कहा गया है की लाखों पेड़ काटे गये है लेकिन सरकारी आंकड़ों की मानें तो 7000 पेड़ कुंभ मेले के दौरान प्रयागराज, प्रतापगढ़, सहसो, मिर्जापुर, करछना ,जारी मार्गो के किनारे काटे गए थे। जिलाधिकारी के यहाँ से मिली जानकारी के अनुसार 100 से 150 पौधे सड़कों के चौड़ीकरण के बाद प्रत्येक राजमार्गों के किनारे लगाए गए हैं। लेकिन यह पेड़ कहा लगे दिख नही रहे है। 3000 पेड़ सिर्फ शहर के बीचो बीच सिविल लाइंस के एसपी मार्ग नवाब युसूफ रोड पीडी टंडन रोड कानपुर रोड जवाहर लाल नेहरू मार्ग एमजी मार्ग कस्तूरबा गांधी मार्ग पुरानी जीटी रोड राजापुर झलवा मार्ग में काट दिए गए। 10 से 15 हजार पौधे शहर की उन मार्गो के किनारे लगाए गए हैं जिनका चौड़ीकारण किया गया है सरकारी दावे के मुताबिक दश हजार पौधे पीडीए चौड़ीकरण के बाद सड़कों के किनारे लगवाएं है।

कोर्ट पंहुचा विषय 

तेज़ धूप के भयंकर प्रकोप से जन जिंदगी अस्त व्यस्त है। लोगों का घर से निकला दुश्वार हो गया है। राह गिरों के लिए कही भी छाँव नही रहा सैकड़ों वर्ष पुराने और मोटे और काफी अधिक घने पेड़ हुआ करते थे। अब सड़कों के किनारे लगाए गए पौधे ज्यादा बड़े नहीं होंगे। लग रहे पौधे बड़े होने पर आकर्षक दिखेंगे पर छाव नहीं होगी। डिवाइडर पर पौधों की ऊंचाई ज्यादा नहीं होगी।मतलब अब शहर में छाव नही होगा।वही शहर के बढ़ गए तापमान पर विधि छात्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में केंद्र सरकार को भी जवाब तलब किया है। सरकार से कोर्ट ने पूछा है कि पेड़ों की सुरक्षा और उसकी लगाने की क्या उपाय किए गए हैं। इसकी सुनवाई 12 जुलाई को होनी है।
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