इस जगह अजीब परंपरा से होता हैं बारातियों का स्वागत, देख कर चौंक जायेंगे आप..!

विवाहों में भी अलग-अलग रिवाज होते है, और कोई विवाह तो बिलकुल ऐसे होते है जिसे सुन कर सब परेशान रह जाते है। विवाहों के बारे में बहुत परंपरा आपने सुने होंगे लेकिन आज हम ऐसे ही अनोखे परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं। आपने शादियों के वक़्त फूल और मालाओं से बारातियों का स्वागत करते हुए तो खूब देखा होगा, किन्तु क्या आपने कीचड से बारातियों का स्वागत करते हुए देखा है।

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जी हां एक ऐसी ही विवाह जहा फूल और माला तो दूर की बात यहाँ कीचड़ से होता है बारातियों का स्वागत। बता दें, मैनपाट का आदिवासी मांझी समाज आज भी अपनी अनोखी परंपरा व संस्कृति के लिए न केवल प्रदेश में जबकि देश में भी चर्चित है। छत्तीसगढ़ में ये परंपरा आज भी चली आ रही है। इस समाज में बारातियों का स्वागत कीचड़ में सराबोर कर किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि लडक़ी पक्ष के लोग बारातियों के सामने इस खेल के माध्यम से अपने शौर्य का प्रदर्शन करते हैं, ये देखने में बहुत आकर्षक होता है।

मांझी समाज में 12 गोत्र हैं, जिनके अनूठे आयोजन हमेशा कौतूहल के मामला बने रहते हैं। सभी गोत्र की अपनी अलग-अलग परम्परा है। मांझी समाज का भैंस गोत्र व तोता गोत्र में शादी की अपनी अनोखी परंपरा है। भैंस गौत्र में लडक़ी पक्ष के लोग बारात आने से पूर्व मिट्टी खेलने की तैयारी करके रखते हैं और बारात पहुंचने के बाद कीचड़ में एक-दूसरे को सराबोर करते हैं। इस वक़्त मांझी समाज के साथ ही आसपास रहने वाले सभी लोग बारातियों के सामने मिट्टी खेलकर अपने शौर्य का प्रदर्शन करते हैं।

जब कभी किसी मांझी के घर बारात पहुंचता है तो कीचड़ में खेलने के लिए हुजूम उमड़ पड़ता है। बारात पहुंचने के सप्ताह भर पहले से खेत को पानी व मिट्टी डालकर तैयार किया जाता है। जब ये पूरी प्रकार से कीचडयुक्त हो जाता है तो बारात के पहुंचने पर वहां पर जमकर मिट्टी खेली जाती है।