मृत्यु के बाद भी जिंदा रहते हैं यहां के लोग, मान्यता है यहां खुशियां लेकर आती है मृत्यु..!

अपने करीबियों से हम सभी प्रेम करते हैं, लेकिन जब वह हम से बिछड़ जाते हैं तो वो घड़ी हमारे लिये सबसे दुख भरी होती हैं।जब किसी की मरी होती है तो उसके बाद या तो उसे जलाया जाता है या फिर दफनाया जाता हैं।लेकिन इंडोनेशिया में एक ऐसा समुदाय है जो  किसी की मृत्यु पर दुख नही जताता बल्कि खुशियां मनाई जाती हैं।

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इंडोनेशिया में रहने वाले दक्षिण सुलेवासी प्रांत का टोराजा समुदाय अपने परिजनों की मौत के बाद उन्हें जलाता या दफ्नाता नहीं है बल्कि उन्हें अपने साथ एकदम जिंदा व्यक्ति की तरह रखता हैं।साथ ही उन्हें जिंदा इंसानों की तरह सजाया - संवारा जाता हैं।उनके साथ फोटों सेक्शन भी रखा जाता है इतना ही नहीं उनके लिए एक विशेष समारोह का आयोजन भी किया जाता हैं।


कहते है हर तीन साल बाद यहां मुर्दे घर लौटकर आते हैं। इस समुदाय के लोग मरे हुए इंसान के साथ जीवित व्यक्ति की तरह ही व्यवहार करते हैं। वह मारे हुए लाश को अपने परिवार का  हिस्सा मानते हुए ऐसा करते हैं।वह घर में लाश को ठीक वैसे ही रखते जैसे उसे मरने से पहले रखते थे।  यह के लोग मृतक को मार हुआ नहीं बल्कि रोगी मानते है जिसे मकुला कहा जाता हैं।

लोग बकायदा इसके लिए विशेष समारोह का आयोजन भी करते हैं। जहां ये लोग उनके साथ नाचते-गाते इस धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होते हैं। इस गांव की प्रथा काफी विचित्र हैं। यहां के लोगों का मानना है कि इंसान कभी मरता नहीं हैं। इसीलिए ये लोग मरने पर गम के बजाए उत्सव मनाते हैं। तोरजा गांव के लोग अपने परिजनों की शव सुरक्षित रखने के लिए किसी खास तरह के केमिकल का उपयोग करते हैं। भले ही आपको ये परंपरा डरावनी लगे लेकिन अब ये परंपरा टोराजा समुदाय के लोगों की जिंदगी का हिस्सा हैं। जिसे वो लोग बड़ा प्रेम से निभाते चले आ रहे हैं।