एक ऐसा गांव जहां गोरा बच्चा पैदा होने पर मिलती है मौत की सजा, जाने क्या है इसके पीछे का राज..!

प्रत्येक स्त्री की इच्छा होती है कि उसके होने वाले बच्चे बहुत सुंदर हो। माता पिता का रंग चाहे कैसा भी हो लेकिन सभी बच्चा सुंदर चाहते हैं। पहले अंग्रेजों ने रंगभेद की नीति चलाई थी जिसे लेकर बहुत लोगों ने विरोध किया था। इस नीति के अंतर्गत अग्रेज लोगों पर अत्याचार करते थे। किन्तु आज भी संसार में एक ऐसी जाति है। जो गोरे रंग से नफरत करती है।

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जबकि इसके पीछे कीसी नस्ल से नफरत करना नहीं है। बता दें कि इस जाति में गोरा बच्चा पैदा होने पर उसे मौत के मुंह में धकेल दिया जाता है। इस जाति में गोरे बच्चे को स्वीकार नहीं किया जाता है। वैसे तो बच्चा कैसा भी हो उसका रंग कैसा भी हो सभी को प्यारा लगता है। सुंदर बच्चे के लिए स्त्री को गर्भावस्था के दौरान कई तरह की चीजे खाने को दी जाती है।

जिससे उसके सुंदर बच्चा पैदा हो। किन्तु इस जनजाति में बच्चा काला पैदा हो इसके लिए गर्भवती स्त्रियों को जानवरों का खून पीलाया जाता है। दोस्तों ये प्रजाति भारत के अंडमान निकोबार में पाई जाती है। जिसे जारवा जनजाति कहा जाता है। इस जनजाति के लोगों का सोचना है कि यदि बच्चा गोरा दिखा तो वह उनके मजहब से अलग नजर आएगा।

जो उनको अपने आप से अलग समझेगा। जिसके चलते उस बच्चे को बचपन में ही मार दिया जाता है। सोचने वाली बात ये है कि 21वीं सदी में भी लोगों की मानसिकता नहीं बदली है। क्या बेगुनाह बच्चे को रंग के चलते इस प्रकार की सजा देना सही है।