आश्चर्य : छह वर्ष से खाली गोद भरी, एक साथ दिया चार बच्चों को जन्म...!

कहते हैं 'देने वाला जब भी देता है तो छप्पर फाड़कर देता है। कुछ ऐसी ही मिसाल गोंडा की एक महिला पर फिट बैठती है। शादी के छह वर्ष बाद भी महिला को बच्चा नहीं हो रहा था। जिसकी वजह से वो बहुत परेशान थी। वहीं जब वो प्रेग्नेंट हुई थी तो उसे उम्मीद नहीं थी कि उसे एक नहीं चार-चार बच्चे होंगे।

यूट्रस में सूजन का चल रहा था इलाज

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गोंडा के कपूरपुर साईं तकिया निवासी रेहाना (25) की शादी वर्ष 2013 में हुई थी। पति जियाउल हक मुंबई में प्राइवेट नौकरी करते हैं। बच्चे न होने पर गोंडा की एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से उपचार प्रारंभ कराया गया। जियाउल के मुताबिक, जांच में पता चला कि रेहाना के यूट्रस (बच्चेदानी) में सूजन थी। उपचार के बाद रेहाना ने गर्भधारण किया। बुधवार को रेहाना को प्रसव पीड़ा प्रारंभ हुई। उन्हें राजधानी के पुरनिया स्थित एक निजी अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. आशा मिश्र, एनेस्थेटिस्ट डॉ. पुरुनेंद्र, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वैभव जैन आदि की टीम ने ऑपरेशन से प्रसव कराया। चारों बच्चे बड़े ऑपरेशन से जन्मे।

अल्ट्रासाउंड में आया था मल्टीपल बेबी

डॉक्टरों के मुताबिक, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में मल्टीपल बेबी लिखा था। चार बच्चे होने का जिक्र नहीं था। महिला का आठ माह में प्रसव हुआ। सभी बच्चे अलग-अलग लेयर में थे। बच्चेदानी में उनकी नाल अलग-अलग जगह जुड़ी हुई थीं, जिससे उन्हें पोषक तत्व मिल रहे थे।

पति ने कहा- मांगे थे दो मिल गए चार

पति जियाउल हक ने कहा कि छह वर्ष से बच्चे नहीं हो रहे थे। मैंने ऊपरवाले से दो बच्चे मांगे थे मुझे चार मिल गए। जियाउल हक पेशे से मजदूर हैं और मुंबई में काम करते हैं। महिला का ऑपरेशन डॉ अाशा मिश्रा ने किया है। उन्होंने बताया कि जच्‍चा बच्चा सभी स्वस्थ्य हैं। ऑपरेशन में केवल एक यूनिट ब्लड लगा। वहीं डॉक्टर भी एक साथ चार बच्चे होने के मामले को बड़ी हैरानी से देख रहे हैं। अक्सर इंफर्टिलिटी ट्रीटमेंट आईवीएफ में एक साथ दो या तीन बच्चे होने के केस आते हैं।

मदरसे में नहीं, कॉन्वेंट पढ़ाएंगे

रेहाना के पति जियाउल हक ने कहा कि वर्षो बाद संतान का सुख मिला है। प्लान दो ही बच्चों का था, मगर ऊपर वाले ने चार बच्चे घर भेज दिए। ऐसे में बेटे-बेटी सभी को समान शिक्षा दूंगा। इन्हें मदरसे में पढ़ाने के बजाय कॉन्वेंट में पढ़ाएंगे। उनका सपना बच्चों को इंजीनियर बनाने का है।

चारों बच्चे और मां स्वस्थ

गोंडा निवासी महिला के चार बच्चों में दो बेटे और दो बेटियां हैं। इनमें से एक का वजन 1.750 ग्राम, दूसरे का 1.110 ग्राम, तीसरे का एक किलो, चौथे का वजन 1.400 किलो है। बच्चों की हालत सामान्य है। बच्चों के शरीर का तापमान मेंटेन रखने और संक्रमण से बचाव के लिए उन्हें वार्मर में रखा गया है। वहीं, रेहाना को एक यूनिट खून चढ़ाया गया। वे होश में हैं। चारों बच्चे और मां स्वस्थ हैं।

इसलिए होता है ऐसा

डॉ. एसपी जयसवार के मुताबिक, प्रेग्नेंसी के लिए अगर महिला अंडा बनाने की दवा खाती है तो मल्टीपल प्रेग्नेंसी के चांस बढ़ जाते हैं। इसमें कई अंडों के साथ शुक्राणु का निषेचन हो जाता है।

10 हजार में एक मामले में होते हैं एक साथ चार बच्चे

क्वीनमेरी की चिकित्सा अधीक्षक व वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी जयसवार ने बताया कि नेचुरल प्रेग्नेंसी में चार बच्चे होना रेयर है। करीब 10 हजार में एक केस ऐसा होता है। वहीं, प्री-टर्म डिलिवरी और कम वजन का बच्चा होना खतरा बढ़ाता है। लेकिन इस मल्टीपल प्रेग्नेंसी में प्री-टर्म डिलीवरी होने के बावजूद एक किलो से अधिक के बच्चों का होना अच्छा संकेत है। अमूमन एक बच्चे में 2.5 से 3.5 व दो बच्चों में 2 से 2.5 किलो का बच्चा सामान्य माना जाता है। वहीं, चार बच्चों में वजन एक किलो से कम चला जाता है।

पहले भी आ चुका है ऐसे केस

पांच साल पहले एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को क्वीन मेरी में तो डफरिन में तीन वर्ष पहले एक साथ तीन बच्चों को महिला ने दिया था जन्म।