बिहार के इस गांव में नहीं है कोई भी व्यक्ति बेरोजगार, औरतें देती हैं मर्दो को काम...!

बिहार के नक्सल प्रभावित शिवहर जिले में एक अनोखा गांव है, जहां स्त्रियां खेती करती हैं। अपनी मेहनत के बदौलत ये स्त्री किसानों ने पूरे उत्तर बिहार में एक अलग पहचान बनाई हैं। गांव की स्त्रियां ने खेती के बदौलत न सिर्फ गांव को विकसित कर दिया है, बल्कि गांव के अब कोई भी पुरुष बेरोजगार भी नहीं हैं। इस गांव में खेतों से आपको महिला सशक्तिकरण का रंग देखने को मिलेगा।

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शिवहर जिले के शिवहर प्रखंड का कोठिया गांव अब कोई परिचय का मोहताज नहीं हैं। यह गांव पूरे उत्तर बिहार में विकास के रूप मे अपनी नई पहचान बना चुका हैं। महिला किसान अपनी मेहनत के बदौलत इस गांव के विकास में एक नई इबादत लिख रही हैं। 4000 हजार की आबादी वाले इस गांव में तकरीबन साढ़े सात सौ एकड़ जमीन पर सब्जी की खेती अधिक मात्रा में होती हैं।

महिला किसान सुबह-सुबह जाकर अपने खेतों से सब्जी तोड़कर लाती हैं और उसे बेचने के लिए बाजार में भेज देती हैं। यहां की सब्जी शिवहर के विभिन्न बाजारों के बावजूद पड़ोसी जिले सीतामढ़ी, मुजफ्फपुर और दरभंगा समेत कई शहरों में भेजा जाता हैं। 5 सालों के अंदर सब्जी की खेती के बदौलत गांव के प्रत्येक घर न सिर्फ सुखी संपन्न हुआ बल्कि गांव में विकास की अब नई बयार बहने लगी हैं।

गांव का कोई पुरुष अब मेहनत मजदूरी करने के लिये देश के अन्य महानगरो में नहीं जाता हैं। एक महिला किसान ने बताया कि पहले गांव की तस्वीर कुछ दूसरी थीं। दूसरे गांव की तरह इस गांव में भी बेरोजगारी और बदहाली जर्रे- जर्रे में समाई हुई थीं, लेकिन गांव में कुछ महिलाओं ने महिला किसान कल्ब का गठन किया।

ऐसे में उस संगठन में सैकड़ों महिलाएं जुड़ गईं। फिर आधुनिक खेती के बदौलत स्त्रियों ने अपने भाग्य संवारने का निर्णय लिया। महिलाओं की इस बेहतरीन काम के लिए सरकार से भी वक्त वक्त पर कम ही सही लेकिन सहायता मिलती हैं।कहा जा रहा है कि गांव की ये महिलाएं किसान वर्मी कम्पोस्ट, मिश्रित खेती और श्रीविधि खेती के बदौलत परम्परागत खेती मे भी महारत हासिल कर चुकी हैं।गांव की महिला किसानों को अपने आप पर गर्व है तो पुरुष भी कम खुश नहीं हैं।

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