इस देश में पति चुनने के लिए बाजार में खड़ी होती हैं लड़कियां, साथ ही लड़कियों को करना होता है ये काम..!

हमारे देश में जहां शादी एक पवित्र बंधन माना जाता है, जिस बंधन में सात वचन देकर पति-पत्नी एक दूसरे का सम्मान और साथ देने का वचन देते है और एक दूसरे का साथ निभाने की कसमें खाते है। तो वहीं विश्व में एक ऐसा देश है जहां के बाजारों में नाबालिग लड़कियो खुलेआम बेचा जाता हैं।

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दुनिया में बुल्गारिया एक देश ऐसा है जहां हर साल लड़कियों के बेचने के लिए चार बार बाजार सजता है। बुल्गारिया में शादी के लिए ये लड़कियां बेची जाती हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि यहां पर युवतियों को बेचने का काम मां-बाप ही खुशी-खुशी करते हैं।

वहीं लड़कियों को इस बाजार में बिकने का कोई दुख नहीं होता है। इसके इतर वो इस बाजार को एक जरिया मानती है, जहां उन्हें सही वर तलाशने का बेहतर मौका मिलता है। बता दे कि  2007 में  यह यूरोपीय संघ में शामिल हुआ था। जिस बाजार का हम जिक्र कर रहे है वो बुल्गारिया में बचकोवो मोनेस्ट्री के नजदीक लगता है। इस बाजर का लगने कारण है, यहां कि रूढ़िवादी सोच , जो लड़कीयों को इस तरह के बाजार में बिकने को मजबूर कर देता है।

रोमा समुदाय की लड़कियों का जब मासिक धर्म शुरू होता है तो उन्हे स्कूल से निकाल दिया जाता है। जिसके बाद उनका समुदाय उन्हे पढ़ने की इजाजत नहीं देता बल्कि उन्हे शादी के लायक मान लिया जाता है। यही वजह है कि बुल्गारिया में जिन युवतियों को शादी के लिए बेचा जाता है उनमें ज्यादातर नाबालिग ही होती हैं।

बुल्गारिया में ब्राइडल मार्किट साल में चार बार सजती है। शादी की इच्छा रखने वाली युवतियां यहां पर खुद या फिर अपने परिजनों के साथ दुल्हन की तरह तैयार होकर आती हैं। युवतियों की इच्छा में यहां पर लड़के भी होते हैं। इस बाजार में युवक और युवती अपने पसंद के अनुसार एक दूसरे से बात करते हैं।

इस चर्चा में उनका काम-धंधा, पसंद-नापसंद, परिवार से संबंधित जानकारी उपस्थित होती है। यहां आने वाले युवकों के लिए जहां युवती का खूबसूरत होना और घर का काम करना सबसे मुख्य होता है वहीं युवतियों के लिए युवक की आय सबसे अधिक मायने रखती है।

बुल्गारिया में रोमा मजहब संपन्न धर्मो में नहीं आता। यहां पर आज भी ये लोग अभाव में जिंदगी जीते हैं। यही कारण है कि युवतियों को एक ऐसे युवक की खोज होती है जिसके पास पैसा हो और जो उन्हें अच्छी जीवन दे सके। कुछ युवतियां खुशी-खुशी तो कुछ मजबूरन इसमें उपस्थित होती हैं।