आधुनिक पद्धति से खेती करके परिवार में लाईं बहुत खुशहाली, पहली ही फसल में उतार दिया कर्ज..!

जिंदगी हौसले और ताकत से चलती है। कर्ज का बोझ और पास में एक इंच भी जमीन नहीं। अति विषम परिस्थितियों में भी जीवन को खुशहाली की राह पर लाने की जद्दोजहद बुंदेलखंड के उन किसानों के लिए मिसाल है, जो कठिनाइयों के सामने अपना हौसला खो देते हैं।

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ये जद्दोजहद है रानी की। रानी देवी.. जो जमीन से तो रंक हैं, किन्तु हौसले और हिम्मत में किसी मलिका से कम नहीं। पति शिवलाल पढ़े-लिखे नहीं हैं। खेती के लिए जमीन नहीं। ऐसे में मजदूरी ही रास्ता था, जिससे घर का गुजारा हो। बच्चे इतना भर पढ़ पाए कि किसी प्रकार दो जून की रोजी-रोटी कमा सकें। कभी दिन खाली पेट गुजरा तो कभी रात फाके में कटी। भुखमरी की नौबत आ गई तो रहा नहीं गया और 45 वर्षीय रानी ने घूंघट हटाने का निर्णय किया।
वह खेती करने उतरीं तो लोगों ने उपहास किया, किन्तु ये कर्ज के दर्द से बड़ा नहीं था। आठवीं बाद कभी भी किताब न छूने वाली रानी ने किसानी समझने के लिए समर्थ संस्था से संपर्क किया। संस्था ने उन्हें कृषि वैज्ञानिकों से मिलवाया और यहीं से राह खुली।

बटाई की जमीन पर खड़ा किया खुशियों का मचान

रानी देवी का गांव खरौंज काफी अधिक पिछड़ा हुआ है। 15 वर्ष पहले खड़े हुए खंभे आज भी बिजली का इंतजार कर रहे हैं। कुछ खरीदने के लिए पांच किमी दूर कुरारा कस्बे या 23 किमी दूर हमीरपुर मुख्यालय जाना पड़ता है। ऐसे में खेती आसान नहीं थी, किन्तु रानी हार नहीं मान सकती थीं। वह जहां से चली थीं, पीछे हटने का प्रशन ही नहीं था।

मिन्नतें कर बलकट यानी बटाई पर तीन बीघा खेत लिया। छोटे-छोटे टुकड़े पर मचान विधि से खेती शुरू की। एक साथ कद्दू, लौकी और गोभी कम लागत में उगाई। मुनाफा मिला और कर्ज उतर गया। इसी वर्ष उन्होंने एक ही खेत में पांच फसलें कद्दू, लौकी, गाजर, गोभी और मिर्च ली है। रानी अब आसपास के गांवों के लिए मिसाल हैं। कृषि विभाग ने उन्हें प्रगतिशील किसान से सम्मानित किया है।

भूमिहीन होने के बावजूद नई पद्धति, परिश्रम और लगन से खेती कर रानी परिवार में खुशहाली ले आईं। आस-पड़ोस के लोग उनसे प्रेरित होकर मचान विधि से खेती कर रहे हैं।

मीना खातून, खरौंज (ग्रामीण)

नई तकनीक के जरिए परंपरा से कहीं अधिक पैदावार लेकर रानी ने दो वर्ष में ही समृद्धि की राह पकड़ ली। दूरदराज से लोग उनकी खेती देखने आते हैं। कृषि विभाग ने उन्हें सम्मानित किया।

बशीर मोहम्मद, ग्राम प्रधान खरौंज

हमने सिर्फ राह दिखाई। लगन और परिश्रम ने रानी को दूसरे किसानों की प्रेरणा बनाया। संस्था ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करती है, जिनमें कुछ करने की लगन होती है।

देवेंद्र गांधी, समर्थ फाउंडेशन के सचिव

भूमिहीन स्त्री को प्रगतिशील किसान का सम्मान मिलना गौरव की बात है। मचान विधि से कम लागत में अधिक पैदावार लेकर सिद्ध किया कि परिश्रम से सब संभव है।