भारत में महामारी के तरह फैल रही है ये रोग, अपनाइए ये घरेलू नुस्खे..!

मिर्गी मस्तिष्क से जुड़ी रोग है। मस्तिष्क में प्रवाहित होने वाले विद्युत प्रवाह की गति तेज होने की वजह से झटके आते हैं। बार-बार झटके आने पर इसे मिर्गी माना जाता है। इससे ग्रस्त व्यक्ति प्रत्येक स्तर में सामान्य होता है, किन्तु इस रोग को लेकर काफी प्रकार की भ्रांतियां फैलाई गई हैं।

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इसका उपचार भी संभव है। विश्वस्तर पर सात करोड़ लोगों को मिर्गी की रोग है। जबकि भारत में 1.2 करोड़ इस रोग से ग्रसित हैं। एक अध्ययन के मुताबिक नागपुर में 32 हजार मरीज हैं, जिसमें से 15 हजार के तकरीबन बाल रोगी हैं। मिर्गी की दवा काफी सुरक्षित होती है।

गर्भावस्था में भी डॉक्टरों की सुझाव पर इसका सेवन किया जा सकता है। इसलिए मिर्गी से घबराने की आवशयकता नहीं है। ये जानकारी मष्तिस्क रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज बाहेती, बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विनित वानखेड़े व डॉ. जे. करणकुमार ने पत्रकारों से चर्चा में दी. डॉ. बाहेती ने बताया कि झटके चंद सेकंड के लिए भी आते तो बहुत बार झटके लंबे वक़्त तक के।

ये केवल मस्तिष्क में प्रवाहित होने वाली विद्युत तरंगों की कारण से होती है। चोट लगने, पेट की क्रीमी मस्तिष्क में जाने, मस्तिष्क में क्लॉटिंग आदि से भी ये रोग हो सकती है। ये झटके स्थायी नहीं होते। मिर्गी से ग्रसित व्यक्ति सामान्य होता है।

ये रोग किसी भी आयु में हो सकती है। बचपन व वृद्धावस्था में इसके लक्षण ज्यादा दिखते हैं। 100 में से एक को मिर्गी हो सकती है। नागपुर में 14 हजार महिलाओं में इस बीमारी के लक्षण मिलने का अंदाजा है।

52 फीसदी मरीज की रिप्रोडक्टिव एज होती है। जिस स्त्री को मिर्गी होती है, वह गर्भधारण करने के साथ ही अपने बच्चे को दूध पिला सकती है।

ऐसे करें बचाव


न्यूरोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. रजनीश कुमार बताते हैं कि मिर्गी अधिकतर युवाओं में देखी जाती है। पर्याप्त नींद, कच्ची सब्जियों से परहेज, साफ पानी से धुली सब्जियों को छीलकर खाने से मिर्गी से बचा जा सकता है। मिर्गी रोग भगाने के लिये बालासन, नाड़ी शोधन, कपोतासन, शीर्षासन और चमत्‍कारआसन काफी लाभदायक होता है।
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