उस जांबाज कमांडो की कहानी, जिसने कारगिल युद्ध में अकेले ही मारे थे 48 पाकिस्तानीयों को..!

आज हम आपके लिए कारगिल के हीरो की कहानी लेकर आए हैं। राजस्थान के सीकर के रहने वाले रिटायर्ड फौजी दिगेंद्र कुमार की ये कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा दायक है और देशभक्ति का जज्बा दिखाती है। साल 1999 के कारगिल वार में दिगेंद्र ने डटकर पाकिस्तानी फौज का सामना किया था। इस दौरान उन्हें पांच गोलियां भी लगी, फिर भी उन्होंने कुल 48 पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को मार गिराया था। तब भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी दिगेंद्र की पीठ थपथपाई थी।

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हाल ही में कारगिल हीरो महावीर चक्र विजेता दिगेंद्र कुमार ने कारगिल युद्ध की दास्ताँ सुनाई। साथ ही उन्होंने रोचक किस्सा भी सुनाया जब उन्होंने पाकिस्तानी मेजर की गर्दन काट दी थी। दिगेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने पाकिस्तानी मेजर अनवर की गर्दन काट दी थी। उन्होंने बताया कि, मुझे पांच गोलियां भी लगी, फिर भी कुल 48 पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को मार गिराया।

दिगेंद्र ने बताया, उन्होंने और उनके साथियों ने जमीन से 5 हजार फुट ऊपर पहाड़ियों में कीलें ठोंक दी और मंजिल तक पहुंचने के लिए रस्सा बांध दिया। योजना के अनुसार, तोलोलिंग पहाड़ी को मुक्त कराने के लिए कमांडो टीम में मेजर विवेक गुप्ता, सूबेदार भंवरलाल भाकर, सूबेदार सुरेन्द्र सिंह राठोर, लांस नाइक जसवीर सिंह, नायक सुरेन्द्र, नायक चमनसिंह, लांसनायक बच्चूसिंह, सी।ऍम।अच्।

 जशवीरसिंह, हवलदार सुल्तानसिंह नरवारिया एवं नायक दिगेन्द्र कुमार थे। उन्होंने कहा, यह काम आसान नहीं था, क्योंकि पाकिस्तानी सेना ने ऊपर चोटी पर अपने 11 बंकर बना रखे थे और उससे ऊपर घना अंधेरा था। वहां सब ठंड से जम रहे थे और मैं धीरे-धीरे बंकर की तरफ जा रहा था। तभी उन्हें एहसास हुआ कि वह दुश्मन के बैरक के बिल्कुल करीब हैं। दिगेन्द्र ने एक हथगोला बंकर में सरका दिया, जो जोर के धमाके से फटा और अन्दर से आवाज आईः ‘अल्हा हो अकबर, काफिर का हमला।’ दिगेन्द्र का तीर सही निशाने पर लगा था। पहला बंकर राख हो चुका था।

इसके बाद दोनों ओर से फाइरिंग हुई। दिगेन्द्र बुरी प्रकार जख्मी हो गए। उनके सीने में तीन गोलियां भी लगी थी। एक पैर बुरी प्रकार जख्मी हो गया था। एक पैर से जूता गायब और पैंट खून से सनी हुई थी। दिगेन्द्र की एलएमजी भी हाथ से छूट गई थी। साथी सूबेदार भंवरलाल भाकर, लांस नाइक जसवीर सिंह, नायक सुरेन्द्र, नायक चमनसिंह, सुल्तानसिंह और मेजर विवेक गुप्ता शहीद हो चुके थे पर दिगेन्द्र ने ताकत नहीं हारी।

दिगेन्द्र ने अकेले ही 11 बंकरों में 18 हथगोले फेंके और उन्होंने सारे पाकिस्तानी बंकरों को नष्ट कर दिया। तभी दिगेन्द्र को पाकिस्तानी मेजर अनवर खान नजर आया। वह झपट्टा मार कर अनवर पर कूद पड़े और उसकी हत्या कर दी। दिगेन्द्र पहाड़ी की चोटी पर लड़खड़ाते हुए चढ़े और 13 जून 1999 को सुबह चार बजे तिरंगा गाड़ दिया। तत्कालीन सरकार ने दिगेन्द्र कुमार को इस अदम्य साहस पर महावीरचक्र से भी नवाजा।