मेडिकल कॉलेल अस्पताल में मरीज को चढ़ा दिए दूसरे ग्रुप का ब्लड, फिर जो हुआ..!

नंदई निवासी 67 वर्षीय ईश्वरलाल देवांगन मेडकिल कालेज अस्पताल के डाक्टरों और लैब कर्मचारियों की लापरवाही से जीवन की जंग लड़ रहे हैं। बी-पाजीटिव रक्त समूह वाले मरीज के शरीर पर एबी-पाजीटिव ग्रुप का खून चढ़ा देने से उनकी डिकनी डैमेज हो गई। बड़े शहर के निजी अस्पतालों में उपचार कराने से लाखों रुपए खर्च करने पड़े। इसके बाद भी तबीयत नहीं सुधर पा रही है। अब हर 5वें दिन डायलिसिस कराने में लाखों रुपए और खर्च करने पड़ रहे। इसकी शिकायत पीडि़त मरीज की पत्नी अहिल्याबाई ने कलेक्टर और एसपी के अतिरिक्त सीएमएचओ से की है।

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उपचार में लापरवाही को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले मेडिकल कालेज अस्पताल में फिर डाक्टरों की लापरवाही सामने आई है। बी-पाजीटिव ग्रुप के मरीज को एबी-पाजीटिव ग्रुृप का खून लगा दिया गया। तबियत बिगडऩे पर रायपुर रेफर कर दिया गया। बाद में वापस मेडिकल कालेज में भर्ती कराने पर कराई गई जांच में रक्त समूह बी-पाजीटिव बताया गया। इस प्रकार एक ही मरीज के दो रक्त समूह निकाले गए।

मरीज की पत्नी अहिल्याबाई ने बताया कि ८ अप्रैल को ईश्वरलाल को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। खून की कमी बताते हुए ड्यूटीरत डाक्टर ने तुरंत रक्त जांच के लिए वहां के सेंट्रल लैब में भेजा। जांच रिपोर्ट मेडिकल कालेज के पुरूष मेडिकल वार्ड में भेजी गई। ड्यूटी में तैनात नर्स ने एबी पाजीटिव ग्रुप के दो यूनिट रक्त की व्यवस्था करने कहा। परिचितों से रक्तदान कराकर खून की व्यवस्था कर दी गई। उसके बाद रक्त मरीज को चढ़ा दिया गया। उसके बाद 12 अप्रैल को मरीज को छुट्टी दे दी गई, किन्तु तबीयत में कोई सुधार नहीं आया।

खून जांच के बाद दी दवाई


चार दिनों बाद मेडिकल कालेज के एक डाक्टर के सरकारी आवास में ईश्वर को फिर दिखाया गया। उन्होंने जांच के बाद एक माह की दवा लिख दी। इससे भी स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हो पाया। एक मई और फिर 20 मई को उसी डाक्टर से फिर चेकअप कराया गया। उन्होंने नई दवाइयां लिख दी। इसके बाद भी तबीयत ठीक नहीं हुई, तो एक अन्य सरकारी डाक्टर के घर जाकर मरीज को दिखाया गया। उन्होंने खून की कंप्लीट जांच समेत कई अन्य प्रकार की जांच के लिए भी सलाह दी।

किडनी हो गई खराब


डाक्टर की सलाह पर आरडीसी में सभी प्रकार की जांच कराई गई। रिपोर्ट देखकर डाक्टर ने किडनी खराब होने की बात कही। साथ ही रायपुरप स्थित डीकेएस हास्पिटल में उपचार कराने की सलाह दी गई। वहां डायलिसिस कराने की बात कही गई, जिसकी सुविधा वहां न होने पर परिवार वाले चार जून को मरीज को बीएम शाह अस्पताल भिलाई ले गए। वहां लगातार चार बार डायलिसिस कराया गया। ९ जून को यह कहकर डिस्चार्ज किया गया कि हर पांच दिन में डायलिसिस कराना होगा। तबसे नियमित डायलिसिस कराया जा रहा है।

दोबारा जांच में ग्रुप बदला


इसके बाद भी बुखार नहीं रूकने पर 21 जून को वापस मेडिकल कालेज अस्पताल में मरीज को भर्ती कराया गया। डाक्टरों ने एक बार फिर रक्त जांच कराने कहा गया। इस बार वहां मरीज इश्वर का ब्लड ग्रुप बी-पाजीटिव बताया गया। परिजनों की शिकायत है कि सरकारी डाक्टरों और लैब कर्मचारियों की लापरवाही के कारण दूसरे ग्रुप का रक्त चढ़ाया गया। इससे किडनी में प्राब्लम आया। इंफेक्शन के कारण किडनी खराब हो गई। उसके बाद अनावश्यक रूप से मंहगे इलाज में लाखों रुपए खर्च करने पड़े। आगे भी लाखों रुपए खर्च करेने पड़ सकते हैं। इस, दौरान मानसिक रूप से पूरा परिवार त्रस्त है। मरीज की पत्नी अहिल्याबाई देवांगन ने कलेक्टर और एसपी के अलावा सीएमएचओ से पूरे मामले की शिकायत कर जिम्मेदार डाक्टर और लैब प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही लापरवाही के कारण हुई आर्थिक क्षति की भरपायी भी इन्हीं जिम्मेदारों से कराने की भी मांग की गई है।

देखकर बता पाउंगा

इस तरह का मामला मेरी जानकारी में फिलहाल नहीं आया है। कागज देखने के बाद ही कुछ बता पाउंगा। एक ही व्यक्ति का रक्त समूह कैसे अलग-अलग बताया गया, जांच का विषय है। प्रदीप बेक, अधीक्षक, मेडिकल कालेज अस्पताल