बच्चे को गोद लेने से पहले मां ने छोड़ दिया बैंक की नौकरी..!


देवकी की प्रकार जन्म देने वाली मां भले ही उसकी नहीं होगी किन्तु अब यशोदा की प्रकार परवरिश करने वाली मां उसे अवश्य मिल गई। तकरीबन छह माह पूर्व शहर में सड़क के किनारे से लावारिस मिली सात माह की मान्यता को सोमवार को बेंगलूरु से आए एक दंपत्ति ने गोद लिया है। इस दंपत्ति को बच्चे की चाहत का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्त्री ने बालिका को गोद लेने से पहले ही अपनी बैंक की नौकरी भी छोड़ दी।

loading...
अहमदाबाद के पालडी क्षेत्र स्थित शिशु-बाल संरक्षण गृह में छह माह पहले पुलिस की ओर से एक माह की बालिका को लाया गया था। ये बालिका पूर्व क्षेत्र में सड़क के किनारे से मिली थी उस वक्त उसकी आयु तकरीबन एक माह की थी। शिशु गृह में बालिका को नाम मान्यता रखा गया। शिशु गृह में से इच्छुक लोग बच्चों को गोद भी लेते हैं। फिलहाल गोद लेने का ऑनलाइन प्रोसिजर है जिसके अन्तर्गत बेंग्लुरु में रह रहे मूल अहमदाबाद के दंपत्ति ने मान्यतो को गोद लेने की पेशकश की। कानूनी कार्रवाई के बाद सोमवार को मान्यता को अन्तत: अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार कर लिया। पति ध्रुव कुमार और उनकी पत्नी नम्रता सोमवार को यहां शिशु गृह में आए और बालिका को अपना लिया। गोद लेने के कार्यक्रम में दाता और शिशु गृह के पदाधिकारी सी.के. पटेल, दिनेश पटेल, गोपी पांडे, महेश दवे, प्रकाश जानी एवं रीतेश दवे समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।

अच्छी परवरिश के लिए बन गई हाउस वाइफ

मान्यता को मिली मां नम्रता बेंग्लूरू में ही एक बैंक में नौकरी करती थी किन्तु गोद लेने से कुछ दिनों पहले ही उन्होंने नौकरी छोड़ दी। उनका कहना है कि बालिका को अच्छी परवरिश के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ी है।

बिना भेदभाव के मान्यता को अपनाया

वैसे तो शिशु गृह में मान्यता समेत १८ बच्चों (नौ बच्चे और नौ बालिकाओं) की परवरिश की जा रही है। इनमें से बिना किसी ***** भेदभाव के बेंग्लूरु के दंपत्ति ने उसे अपना लिया। पूर्व में शिशु गृह से विदेश में भी बहुत बच्चों को गोद लिया है। एक जमाना था जब लोग केवल लड़कों को गोद लेने के बारे में सोचते थे किन्तु अब लड़कियों को गोद लेने में किसी प्रकार का संकोच नहीं किया जाता है।