राजस्थान की IAS ऑफिसर ने तोड़ी जातिगत भेदभाव, किया कुछ ऐसा की जिससे..!

राजस्थान के धौलपुर जिले की आईएएस नेहा गिरी का अपने इलाके में जब छूआछूत से सामना हुआ तब उन्होंने तय कर लिया वो इसे खत्म करेंगी।

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विषय धौलपुर जिले की बसेड़ी ग्राम पंचायत का है। जहां नुनहेरा गांव में मनरेगा का काम चल रहा था। जब कार्य का निरीक्षण करने के लिए डीएम नेहा गिरी पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि एक स्त्री अपने बच्चे के साथ काम पर लगी है, जबकि उससे हट्टा-कट्टा आदमी वहां पानी पिलाने का काम कर रहा है।

इसे देखकर जब उन्होंने इसका कारण पूछा तब पता चला कि वह स्त्री वाल्मीकि धर्म से आती है। इस धर्म को अछूत माना जाता है इसलिए कोई उसके हाथ से पानी नहीं पीता।

उन्होंने वहां उपस्थित लोगों को जमकर लताड़ लगाई और उस स्त्री के हाथों पानी भी पिया। उन्होंने गांव के लोगों को समझाया कि छुआछूत जैसी कोई चीज नहीं होती है और हर इंसान बराबर होता है। भारत में जाति व्यवस्था में वाल्मीकि धर्म को निचले पायदान पर रखा जाता है।

यहां तक कि दलितों में भी उन्हें सबसे नीचा माना जाता है। इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि आधुनिक होते समाज में आज भी ऐसी कुप्रथाएं जारी हैं। कलेक्टर नेहा गिरी ने वाल्मिकी स्त्री को न सिर्फ सामाजिक हक दिलाया जबकि उसके अंदर आत्मविश्वास भी भरा।