भारतीय नागरिक ली दो PAK महिलाएं, इस तरह से पहुंचीं कराची से बरेली..!

पाकिस्तान के कराची शहर में पली-बढ़ीं दो स्त्रियो को भारतीय नागरिकता के लिए लंबी जद्दोजहद करनी पड़ी। जबकि, तीन दशक की प्रायशो के बाद शहला और मुख्तार राना नाम की दो महिलाओं को जब भारत की नागरिकता मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा।

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शहला और मुख्तार राना की विवाह यूपी के बरेली शहर में हुई थी। दोनों को बरेली इतना भा गया कि उन्होंने यहीं रहने की ठान ली और भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया।

कुछ दिन पहले जब शहला और मुख्तार राना को नागरिकता प्रमाण पत्र मिला तो दोनों की आंखें नम हो गईं। मुख्तार राना के लिए तो ये पल इसलिए भी काफी अधिक भावुक करने वाला था क्योंकि उनके पति उन्हें भारतीय नागरिक बनते देखने के लिए जिंदा नहीं हैं।

कराची से बरेली तक का सफर


पाकिस्तान के कराची शहर के मोहम्मद मुख्तार अहमद की बेटी मुख्तार राना की विवाह वर्ष 1987 में बरेली के निवासी सैयद कमर अली से हुई थी. मुख्तार अहमद भारत विभाजन के वक़्त पाकिस्तान चले गए थे और वहां उनका बड़ा कारोबार था। मुख्तार राना ने विवाह के बाद से ही भारतीय नागरिकता हासिल करने की कोशिश शुरू कर दी। इस दौरान उनके बच्चे हुए, बच्चे बड़े भी हो गए किन्तु नागरिकता पाने की उनकी कोशिश जारी रही।

वह कहती हैं, "निकाह के बाद मैं पाकिस्तान से बरेली आ गई। बरेली इतना अच्छा लगा कि फिर कभी कराची जाने का मन नहीं हुआ क्योंकि यहां भी उसी अपनेपन का अहसास होता था जो कि कराची में था। बस एक ही मुश्किल थी कि मैं यहां की नागरिक नहीं थी, इसलिए मैंने वर्ष 2000 में नागरिकता के लिए आवेदन किया।

मुख्तार राना का बेटा सऊदी अरब में है जबकि बेटी नोएडा स्थित एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम कर रही है। नागरिकता पाने की उन्हें जितनी खुशी है, उससे ज्यादा मलाल इस बात का है कि इस पल को देखने के लिए उनके पति जिंदा नहीं हैं।

बरेली की मुख्तार की ही प्रकार शहला भी भारतीय नागरिकता पाने के लिए 32 साल से संघर्ष कर रही हैं. शहला भी कराची की रहने वाली हैं और बरेली के छिपी टोला में रहने वाले रईस मियां से उनकी विवाह हुई है। रईस मियां ने पाकिस्तान जाकर शहला से निकाह किया था। भारत लौटने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को भारत की नागरिकता दिलाने के लिए दौड़भाग शुरू कर दी थी।

गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद अब इन दोनों महिलाओं को भारतीय नागरिकता मिल गई है। अब इन दोनों को भारत में रहने के लिए लंबी अवधि का वीजा बार-बार नहीं लेना पड़ेगा।

इसी वर्ष कराची में जन्मी दो लड़कियों को पहली बार भारत में वोट देने का अवसर मिला। इन लड़कियों के पिता भारतीय हैं और मां पाकिस्तानी. निदा और फारूख वाराणसी की रहने वाली हैं।

दोनों बहनों के पिता वाराणसी के नसीम अख्तर और कराची की शाहिन बानो की विवाह वर्ष 1989 में हुई थी। बच्चियों का जन्म कराची में हुआ और बाद में बानो वाराणसी आ गईं। पति अख्तर ने विवाह के बाद पत्नी की नागरिकता के लिए आवेदन किया और 2007 में पत्नी को नागरिकता दिलाने में कामयाब रहे। उसके बाद उनकी बेटियों ने नागरिकता प्राप्त की। नागरिकता प्राप्त होने से पहले दोनों बहनें लंबी अवधि के वीजा पर ही रह रही थीं और वाराणसी में पढ़ाई कर रही थीं।